अधिकांश डिजिटल प्रणालियाँ व्यक्तिगत उपभोक्ताओं या बड़े व्यवसायों को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। सामूहिक उद्यमों और सहकारी मंडलियों की आवश्यकताएँ अक्सर इन डिज़ाइनों में दिखाई नहीं देती।
इसके साथ-साथ, डिजिटल साक्षरता, भाषा, इंटरनेट पहुँच और उपकरणों की उपलब्धता में असमानताएँ भी यह तय करती हैं कि सहकारी मंडलियों के भीतर कौन भाग ले पाता है और कौन पीछे छूट जाता है। इसका असर केवल तकनीक के उपयोग पर नहीं, बल्कि सामूहिक निर्णय-निर्माण और भागीदारी पर भी पड़ता है।