स्वर्गीय इलाबेन भट्ट की विरासत (1933–2022)

इलाबेन भट्ट ने सेवा को एक सरल लेकिन गहरे विचार पर आधारित शुरू किया — महिला जब सामूहिक रूप से संगठित होती हैं, तो वे अपनी संस्था बना सकती हैं, अपनी आजीविका को मजबूत कर सकती हैं और अपने भविष्य को आकार दे सकती हैं।

उनका दृष्टिकोण अधिकारों के लिए संगठन और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से आर्थिक विकल्पों के निर्माण को साथ लेकर चलता था। इसके केंद्र में स्वावलंबन, सामूहिक शक्ति और गरिमा से जुड़ा काम था।

इलाबेन अक्सर अनुबंध की बात करती थीं — पारस्परिक संबंध का वह विचार जिसमें आर्थिक, सामाजिक और सामुदायिक कल्याण को अलग-अलग नहीं देखा जाता, बल्कि उन्हें एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा माना जाता है। आज भी यही विचार सेवा को-ऑपरेटिव फेडरेशन के काम और महिला सहकारी मंडलियों के साथ उनके जुड़ाव को दिशा देता है।

“अगर परिवर्तन होना है, तो ये लोगों से ही आना चाहिए।”

उनका काम हमें यह याद दिलाता है कि सहकारी संस्था केवल उद्यम नहीं हैं। वे ऐसे स्थान हैं जहां असंगठित महिला श्रमिक एक साथ आती है, निर्णय लेती है और अपनी वास्तविकताओं के अनुरूप व्यवस्था बनाती है।

आज यह विरासत उन महिला आगेवानों के माध्यम से आगे बढ़ रही है जो अपनी सहकारी मंडलियों का संगठन, संचालन और नेतृत्व कर रही हैं, और सामूहिक स्वामित्व, स्वावलंबन और साझा जिम्मेदारी पर आधारित इस मॉडल को आगे ले जा रही हैं।

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