सेवा सहकारी महासंघ के बारे में

इतिहास

गुजरात राज्य महिला सेवा सहकारी महासंघ की स्थापना, सेवा की उस दोहरी रणनीति से विकसित हुई जिसमें एक और असंगठित महिला श्रमिकों को संघों के माध्यम से संगठित किया गया और दूसरी ओर उन्हें अपनी आर्थिक संस्था बनाने के लिए सहकारी मॉडल विकसित किया गया।

1972 में स्वरोजगार महिलाओं के ट्रेड यूनियन के रूप में सेवा की स्थापना के बाद, इस रणनीति ने पूर्ण रोजगार और स्वावलंबन की दिशा में काम किया — जिसे गांधीजी ने “दूसरी आजादी” कहा था, जो गरिमा, काम और आर्थिक स्वतंत्रता पर आधारित थी।

जैसे-जैसे विभिन्न क्षेत्रों की महिला सहकारी मंडलियाँ बनाने लगीं, यह स्पष्ट हुआ कि प्रत्येक उद्यम अपनी परिस्थितियों में काम करता है, फिर भी प्रबंधन, वित्त और बाजार तक पहुँच जैसी चुनौतिया सभी में समान थीं।

अप्रैल 1992 में, सेवा सहकारी मंडलियों की 900 से अधिक महिला आगेवान अहमदाबाद में एकत्र हुईं। उन्होंने इन चुनौतियों को सामने रखा और ऐसी सामूहिक संस्था की आवश्यकता व्यक्त की जो उनके उद्यमों को सहयोग और सशक्त बना सके।

31 दिसंबर 1992 को गुजरात राज्य महिला सेवा सहकारी महासंघ की स्थापना हुई, जिसने इन सहकारी मंडलियों को एक साझा संस्थागत ढाँचे के अंतर्गत जोड़ा।

दृष्टिकोण

गरीब महिलाओं द्वारा, महिलाओं के साथ, और महिलाओं के लिए संचालित समूहों के साथ कार्य करना, ताकि वे सामूहिक और व्यक्तिगत स्तर पर पूर्ण रोजगार और स्वावलंबन प्राप्त कर सकें।

मिशन

सामूहिक संगठनों और सहकारी मंडलियों के माध्यम से असंगठित महिला श्रमिकों और स्व-रोज़गार से जुड़ी महिलाओं का समग्र सशक्तिकरण।

आज

तीन दशकों से अधिक समय बाद भी, महासंघ विभिन्न क्षेत्रों की महिला सहकारी मंडलियों और सामूहिक संगठनों के साथ कार्य करते हुए ऐसी व्यवस्थाएँ विकसित कर रहा है जो उन्हें संचालित होने, बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने और आगे बढ़ने में सक्षम बनाती हैं।