विभिन्न सहकारी मंडलियों में अत्यधिक गर्मी, बदलते वर्षा चक्र और पानी से जुड़ी चुनौतियां यह तय कर रही हैं कि काम कब और कैसे होगा, कितना उत्पादन हो पाएगा, और महिलाएं किन परिस्थितियों में काम करेंगी।
इन परिवर्तनों का प्रभाव केवल आय तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सहकारी उद्यमों की दीर्घकालिक स्थिरता को भी प्रभावित करता है।
कृषि क्षेत्र में अनियमित वर्षा फसल चक्रों और उत्पादन संबंधित निर्णयों को प्रभावित कर रही है। शहरी और घर-आधारित कार्यों में अत्यधिक गर्मी काम के घंटे, उत्पादकता और कार्य परिस्थितियों को बदल रही है।
कार्यक्षेत्र मानचित्रण अभ्यास (Workspace Mapping Study) यह दिखाती है कि अत्यधिक गर्मी महिला कारीगरों के कार्यस्थलों को सीधे प्रभावित करती है। इस अभ्यास ने घर-आधारित और साझा कार्यस्थलों के बीच अंतर, तथा उन बुनियादी सुविधाओं की कमी को सामने रखा जो महिलाओं की अनुकूलन क्षमता को सीमित करती हैं।
इसके साथ-साथ, जलवायु तनाव अक्सर अवैतनिक श्रम, स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों और अस्थिर आय में वृद्धि से भी जुड़ा है।
सेवा को-ऑपरेटिव फेडरेशन का फोकस आजीविका और उद्यम — दोनों की निरंतरता बनाने पर है । जिसमें स्थानीय स्तर पर विकसित प्रयासों को सहयोग देना शामिल है
जैसे महिला सहकारी मंडलियों द्वारा ईंधन और समय की कमी से जुड़ी चुनौतियों को कम करने के लिए बायोगैस प्रणालियाँ स्थापित करना, या विमो सेवा द्वारा अत्यधिक गर्मी और वर्षा से जुड़े जोखिमों के लिए पैरामीट्रिक बीमा मॉडल विकसित करना।
इसके साथ-साथ, कार्यस्थलों, उत्पादन परियोजना पर जलवायु जोखिमों के प्रभाव को समझने का कार्य भी जारी है, ताकि समाधान बाहरी ढांचों के बजाय सहकारी मंडलियों के अनुभवों और व्यवहारिक प्रक्रियाओं पर आधारित हों।
महिला सहकारी मंडलियों की जलवायु-अनुकूल पहलें